सीएचबी के लगभग 62 हजार फ्लैटों में रहने वाले परिवारों को अभी राहत हेतु इंतजार करना होगा।

चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) के करीब 3 हजार इंडिपेंडेंट मकानों के मालिकों को नीड बेस्ड चेंज के मामले में राहत मिल गई है। प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने इन मकानों में जरूरत के अनुसार निर्माण और बदलाव करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। वहीं, सीएचबी

उनके मकानों में किए गए नीड बेस्ड चेंज नियमित करने हेतु केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी जरूरी होगी। इस बीच सीएचबी फ्लैटों में लिफ्ट लगाने का रास्ता भी साफ हो गया है। प्रशासन शीघ्र ही इस रिश्ते में अधिसूचना जारी करेगा।

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संशोधित नक्शा जमा कर लेनी होगी मंजूरी

पहले से अतिरिक्त निर्माण या बदलाव करा चुके इंडिपेंडेंट मकान मालिकों को संशोधित बिल्डिंग प्लान सीएचबी में जमा कर मंजूरी लेनी होगी। वहीं, पुराने मकान तोड़कर दोबारा निर्माण करने वालों को भी नवीन बिल्डिंग प्लान स्वीकृत कराना होगा। सभी निर्माण चंडीगढ़ बिल्डिंग रूल्स-2017 के तहत ही करने होंगे। इस फैसले से लगभग 2800 से 3000 इंडिपेंडेंट मकानों को राहत मिलेगी। इन्हें मरला मकानों के समान दर्जा मिलेगा।

लिफ्ट लगाने हेतु सहमति जरूरी नहीं

सीएचबी फ्लैटों में लिफ्ट लगाने की लंबे वक्त से लंबित मांग भी पूरी हो गई है। लिफ्ट लगाने में बाधा बन रहे क्लॉज को हटा दिया गया है। अब लिफ्ट लगाने हेतु सभी निवासियों की सहमति लेना अनिवार्य नहीं होगा। निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर लिफ्ट लगाई जा सकेगी।

आवेदन पर 30 दिन में निर्णय करेगा सीएचबी

लिफ्ट लगाने हेतु पंजीकृत आर्किटेक्ट स्व-प्रमाणन योजना के तहत आवेदन कर सकेंगे। सीएचबी को आवेदन मिलने के 30 दिन के भीतर उस पर निर्णय करना होगा। ऑनलाइन बिल्डिंग प्लान अप्रूवल सिस्टम (ओबीपीएएस) की सुविधा शुरू होने तक ऑफलाइन आवेदन भी स्वीकार किए जाएंगे। लिफ्ट और लिफ्ट वेल का क्षेत्र ग्राउंड कवरेज और फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) की गणना में शामिल नहीं होगा। हालांकि, यह छूट इंडिपेंडेंट आवासीय इकाइयों पर लागू नहीं होगी।

राहत हेतु गृह मंत्रालय की मंजूरी जरूरी

सीएचबी के बाकी करीब 62 हजार परिवारों के मकानों में किए गए नीड बेस्ड चेंज नियमित करने हेतु केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी आवश्यक है। इन्हें राहत देने हेतु दिल्ली की तर्ज पर वन टाइम सेटलमेंट स्कीम लागू करने या नवीन मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाने का विकल्प है। फिलहाल इन परिवारों को फैसले का इंतजार करना होगा।

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Source: Dianik Bhaskar