अजनाला के सब डिवीजनल चिकित्सालय में 700 एक्सपायर्ड ट्रामाडोल इंजेक्शन नष्ट करने के प्रकरण की जांच लगातार लटकती जा रही है। पहले छानबीन कमेटी के सदस्यों के छुट्टी पर होने के कारण जांच अटकी रही।

इसके पश्चात सिविल सर्जन डॉ. भारती धवन ने दावा किया कि छुट्टी पर गए कमेटी सदस्य 23 अक्टूबर को ड्यूटी पर लौट आएंगे और फिर मामले की पड़ताल रिपोर्ट मिल जाएगी। सूत्रों के अनुसार, सदस्यों के छुट्टी से लौटने के पश्चात कमेटी ने अजनाला चिकित्सालय का दौरा भी किया लेकिन इसके बावजूद जांच पूरी नहीं हो पाई और न ही रिपोर्ट सिविल सर्जन कार्यालय को सौंपी गई है। सूत्रों के मुताबिक, अजनाला अस्पताल की एसएमओ डॉ. शालू की ओर से वीआरएस हेतु आवेदन दिए जाने और चिकित्सालय का चार्ज डॉ. सुमितपाल सिंह को सौंपे जाने के बीच छानबीन अधूरी पड़ी है।

हैरानी की बात यह है कि कमेटी के सदस्यों के छुट्टी से लौटने और चिकित्सालय का दौरा करने के पश्चात भी छानबीन का निष्कर्ष सामने नहीं आया है। सिविल सर्जन कार्यालय की ओर से इस रिश्ते में फिलहाल कोई सूचना नहीं दी गई। मामले में तत्कालीन कार्यकारी सिविल सर्जन डॉ. रश्मि विज ने पांच सदस्यीय पड़ताल कमेटी गठित की थी। इसमें डीएमसी (डिस्ट्रिक्ट मेडिकल कमिश्नर), ड्रग इंस्पेक्टर, मनोरोग विशेषज्ञ, चीफ फार्मासिस्ट और रामदास अस्पताल के एसएमओ को शामिल किया गया था। कमेटी को रिपोर्ट असिस्टेंट सिविल सर्जन के माध्यम से सिविल सर्जन कार्यालय भेजनी थी। वहां से रिपोर्ट स्वास्थ्य महकमा के डायरेक्टर को भेजी जानी है। शुरुआत में कमेटी के सदस्यों के छुट्टी पर होने की वजह से पड़ताल आगे नहीं बढ़ने की बात कही गई थी।

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इस पर सिविल सर्जन डॉ. भारती धवन ने दावा किया था कि सदस्य 23 अक्टूबर को ड्यूटी पर लौट आएंगे और इसके पश्चात पड़ताल शुरू करवाई जाएगी। सूत्रों के अनुसार, सदस्यों के लौटने के पश्चात कमेटी ने अस्पताल का दौरा किया, किंतु जांच की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। अब तक रिपोर्ट नहीं आने से प्रश्न उठ रहे हैं कि निरीक्षण के पश्चात भी कमेटी किन कारणों से किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाई। 700 एक्सपायर्ड ट्रामाडोल इंजेक्शन नष्ट करने से पहले सिविल सर्जन कार्यालय को लिखित सूचना दी गई थी या नहीं, इन्हें नष्ट करने की अनुमति किसने दी और पूरी प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन हुआ या नहीं, ये भी पड़ताल के अहम बिंदु हैं। एक्सपायर होने से पहले इंजेक्शनों को जिले के दूसरे सरकारी अस्पतालों में भेजने की संभावना पर विचार किया गया था या नहीं यह भी पड़ताल का अहम बिंदु है।

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Source: Dianik Bhaskar