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- Himachal Pradesh Wins BBMB Case In Supreme Court | CM Sukhu Statement
भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) में बिजली के लंबित एरियर प्रकरण में हिमाचल राज्य की सुप्रीम अदालत में विजय हुई है। यह दावा मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने किया। चंबा के मेहला में मीडिया से वार्ता में सीएम ने कहा कि इस कानूनी लड़ाई के पश्चात हिमाचल को आने
बीबीएमबी केस में सुप्रीम अदालत के आज आए निर्णय की विस्तृत सूचना कुछ देर में एडवोकेट जरनल अनूप रत्न मीडिया को देंगे।
वहीं मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि सुप्रीम अदालत में प्रदेश के पक्ष में आए निर्णय से हिमाचल को अपने हिस्से की बिजली मिलने का रास्ता मजबूत हुआ है। इस बिजली को बाजार में बेचकर राज्य हर वर्ष 500 से 1000 करोड़ रुपए तक कमा सकता है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, अगले 20 वर्षों तक हिमाचल को अपने हिस्से की बिजली मिलेगी। यदि इसे 6 रुपए प्रति यूनिट की दर से बेचा जाता है तो राज्य को सालाना लगभग 500 करोड़ रुपए का राजस्व मिल सकता है। वहीं, 15.50 रुपए प्रति यूनिट की दर मिलने पर यह कमाई लगभग 1000 करोड़ रुपए सालाना तक पहुंच सकती है। क्या है पूरा बीबीएमबी विवाद? नीचे दिए स्लाइड में पढ़े…
वाइल्ड फ्लावर हॉल, जेएसडब्ल्यू और किशाऊ के पश्चात बीबीएमबी में जीत
सीएम ने कहा कि बीबीएमबी का प्रकरण राज्य के अधिकारों की लड़ाई में वर्तमान सरकार की चौथी बड़ी जीत है। इससे पहले सरकार वाइल्ड फ्लावर हॉल, जेएसडब्ल्यू और किशाऊ बांध परियोजना के मामलों में हिमाचल के हितों की लड़ाई लड़ चुकी है।
उन्होंने बताया कि सरकार ने किसी व्यक्ति विशेष हेतु नहीं, बल्कि पूरे राज्य के हितों हेतु ये लड़ाइयां लड़ी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन मामलों में मिली सफलताएं बताती हैं कि सरकार राज्य के अधिकारों की रक्षा हेतु प्रतिबद्ध है।
भाजपा पर निशाना- डबल इंजन सरकार ने क्यों नहीं लड़ी हक की लड़ाई
मुख्यमंत्री ने बीबीएमबी प्रकरण को लेकर भाजपा पर भी निशाना साधा। उन्होंने प्रश्न उठाया कि केंद्र और राज्य में भाजपा की डबल इंजन सरकार होने के बावजूद हिमाचल के अधिकारों की लड़ाई क्यों नहीं लड़ी गई। उन्होंने इल्जाम लगाया कि भाजपा प्रदेश के हितों की रक्षा करने में विफल रही।
मुख्यमंत्री ने बताया कि जो अपने हितों का संरक्षण नहीं कर सकते, वे राज्य के हितों की लड़ाई कैसे लड़ेंगे। भाजपा ने हिमाचल के हितों को नजरअंदाज किया और विधायक चोरी करने में जुटी रही।
अभी दो बड़ी लड़ाइयां बाकी, 2032 तक हिमाचल को समृद्ध बनाने का दावा
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के अधिकारों की लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है। वाटर सेस और चंडीगढ़ में हिमाचल की हिस्सेदारी के मुद्दे पर अभी लड़ाई लड़नी बाकी है। उन्होंने कहा कि सरकार इन दोनों मामलों में भी प्रदेश का हक लेने के लिए प्रयास जारी रखेगी।
राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद होने के बाद भी मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि हिमाचल राज्य साल 2032 तक राष्ट्र का सबसे अमीर और समृद्धशाली प्रदेश बनेगा। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे प्रदेश अपने अधिकारों की लड़ाई विजय रहा है, वैसे-वैसे लोगों को उनका हक देने के प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में नवीन योजनाएं ला रही है।







