पंजाब के सरकारी कार्यालयों में आज से दीवाली तक सरकारी दफ्तरों में लोगों के कामकाज नहीं हो पाएंगे। कारण, पंजाब सरकार द्वारा कर्मियों और पेंशनरों की लंबे वक्त से लंबित मांगों के प्रति अपनाई जा रही कथित बेरुखी के खिलाफ पंजाब स्टेट मिनिस्ट्रियल सर्विसे

संगठन की प्रदेश बॉडी के आह्वान पर 5 और 6 नवंबर को प्रदेश भर में दो दिवसीय 'कलम छोड़ो एवं कंप्यूटर बंद' हड़ताल की जाएगी। उसके पश्चात शनिवार, रविवार का वीकेंड और फिर विश्वकर्मा दिवस की छुट्टी के चलते अगले तकरीबन 5 दिन सरकारी दफ्तरों में प्रशासनिक काम पूरी तरह से ठप रहेगा।

पंजाब स्टेट मिनिस्ट्रियल सर्विसेज यूनियन की पठानकोट इकाई जिला अध्यक्ष विशालवीर सिंह ने जानकारी दी कि पिछले पांच वर्षों से कर्मी संगठन सरकार को बार-बार मांग पत्र सौंप रहे हैं और ज्ञापन व बैठकों के जरिए अपनी बात पहुंचा रहे हैं, लेकिन सरकार लगातार उनकी जायज मांगों को नजरअंदाज कर रही है।

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हड़ताल में पठानकोट जिले के सभी विभागों के मिनिस्ट्रियल कर्मचारी पूर्ण रूप से भाग लेंगे और अपने-अपने दफ्तरों के कामकाज से दूर रहकर सरकार के प्रति अपना रोष दर्ज कराएंगे।

कर्मियों और पेंशनरों की मुख्य मांगें

यूनियन के प्रांतीय आह्वान पर कर्मियों ने सरकार के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:

17 जुलाई 2020 का पत्र रद्द करना: सरकार द्वारा 17 जुलाई 2020 को जारी किए गए उस पत्र को तत्काल रद्द किया जाए जो कर्मियों के हितों के खिलाफ है।

पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाली: कर्मियों हेतु पुरानी पेंशन योजना को पूर्ण रूप से बहाल किया जाए।

महंगाई भत्ता (DA): महंगाई भत्ते की बकाया किश्तों का तुरंत भुगतान और जारी किया जाना।

पेंशनरों हेतु गुणांक: पेंशनभोगियों हेतु 2.59 का गुणांक लागू किया जाए। कच्चे कर्मियों को पक्का करना: विभिन्न विभागों में कार्यरत कच्चे एवं अस्थायी कर्मियों को फौरन नियमित (पक्का) किया जाए।

प्रशासनिक कामकाज की रीढ़ हैं कर्मचारी, अनदेखी बर्दाश्त नहीं - विशालवीर

विशालवीर सहित अन्य मुलाजिम नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि मिनिस्ट्रियल कर्मचारी सरकार के पूरे प्रशासनिक कामकाज की रीढ़ की हड्डी होते हैं। जनता और सरकार के बीच की इस मजबूत कड़ी की जायज मांगों को नजरअंदाज करना पूरी प्रकार से गलत है। यदि सरकार ने अब भी उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो संघर्ष को और तेज किया जाएगा।

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Source: Dianik Bhaskar