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- Bathinda Murder Case Verdict | Husband Wife Sentenced To Life Term
बठिंडा जिले के मौड़ मंडी में करीब 11 वर्ष पहले घरेलू विवाद के बीच हुई हत्या के मामले में अदालत ने पति-पत्नी दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अतिरिक्त जिला तथा सत्र न्यायाधीश कुलभूषण कुमार की कोर्ट ने आरोपी मनोज कुमार और महिंदरजीत कौर को भारतीय दं
पिता के वक्तव्य पर दर्ज हुआ था हत्या का केस पुलिस रिकार्ड के मुताबिक 13 जून 2015 को मौड़ मंडी में घरेलू विवाद के बीच राजिंदर कुमार पर हमला किया गया था। इस रिश्ते में मृतक के पिता बृजलाल के वक्तव्य पर थाना मौड़ में स्वर्ण सिंह पुत्र लाल चंद, मनोज कुमार पुत्र दीवान चंद और महिंदरजीत कौर पत्नी दीवान चंद के खिलाफ हत्या और साझा मंशा की धाराओं के तहत मुकदमा नंबर 95 दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता बृजलाल ने पुलिस को कहा था कि 12 जून की रात और अगले दिन महिंदरजीत कौर ने फोन कर उन्हें अपने घर बुलाया था। 13 जून को वह वहां पहुंचे तो मनोज कुमार, महिंदरजीत कौर और स्वर्ण सिंह घर के आंगन में बैठे हुए थे। इसी दौरान उनका बेटा राजिंदर कुमार भी वहां पहुंच गया।
शिकायत के मुताबिक, राजिंदर को देखते ही तीनों आरोपी उत्तेजित हो गए। इल्जाम था कि मनोज कुमार ने कुर्सी उठाकर राजिंदर की छाती पर मारी, जबकि स्वर्ण सिंह ने उसके चेहरे और माथे पर वार किया। महिंदरजीत कौर पर भी राजिंदर के चेहरे पर आक्रमण करने का इल्जाम लगाया गया था। हमले में चोटिल राजिंदर को इलाज हेतु सिविल अस्पताल मौड़ मंडी ले जाया गया, जहां बाद में उसकी जान चली गई।
मेडिकल रिकॉर्ड और गवाहियों को बनाया आधार
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने घायल राजिंदर की मेडिकल लीगल रिपोर्ट (MLR) और अन्य मेडिकल रिकॉर्ड हासिल किए। घटनास्थल से संबंधित साक्ष्य जुटाने के साथ गवाहों के बयान दर्ज किए गए। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल की गई वस्तुओं की बरामदगी कर उन्हें केस प्रॉपर्टी के तौर पर अदालत में पेश किया। पड़ताल पूरी होने के पश्चात 9 सितंबर 2015 को कोर्ट में चालान पेश किया गया। 16 फरवरी 2016 को आरोपियों के खिलाफ चार्ज फ्रेम किए गए। इसके पश्चात सुनवाई के बीच अभियोजन पक्ष ने गवाहों की गवाही और उपलब्ध साक्ष्य कोर्ट के सामने रखे। बठिंडा पुलिस की ओर से मामले की प्रभावी पैरवी की गई, जिसके परिणामस्वरूप कोर्ट ने दो आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
सजा के साथ जेल में बिताई अवधि का मिलेगा फायदा
कोर्ट ने आदेश दिया कि दोषियों की ट्रायल और मुकदमे के बीच पहले से काटी गई जेल अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा। यह लाभ धारा 428 सीआरपीसी के तहत दिया जाएगा। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि मालखाने या किसी अन्य प्राधिकरण के पास रखी केस प्रॉपर्टी को नियमानुसार नष्ट किया जाए।







