मां बगलामुखी धाम, गुलमोहर सिटी में भक्तों द्वारा मां बगलामुखी जी के निमित्त सामूहिक निशुल्क दिव्य हवन-यज्ञ का कार्यक्रम पूर्ण श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ किया गया। आयोजन के प्रारंभ में ब्राह्मणों द्वारा मुख्य यजमान बलविंदर कुमार एवं उनके परिवार से वैदिक रीति-रिवाज मुताबिक पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन और नवग्रह पूजन संपन्न कराया गया, जिसके उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां अर्पित की गईं।

धाम के संस्थापक तथा व्यवस्थापक नवजीत भारद्वाज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए बताया कि आज का सबसे बड़ा महिषासुर कोई बाहरी शत्रु नहीं, बल्कि हर इंसान के भीतर बैठा अहंकार (‘मैं’) है। युगों का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि कलियुग में यह राक्षस अत्यंत सूक्ष्म होकर हमारी सोच, जुबान और सीने में केवल एक अक्षर ‘मैं’ बनकर बैठ गया है। ‘मैंने किया’, ‘मेरा परिवार’ और ‘मेरी कमाई’ जैसी सोच इंसान को अंदर से खोखला कर रही है। यह सूक्ष्म राक्षस दान, पुण्य और सेवा के बीच भी साथ आ जाता है और हर नेकी को निष्फल कर देता है। इस ‘मैं’ (अहंकार) के रोग से मुक्ति केवल ईश्वर की शरण में जाने से मिलती है, क्योंकि जहां ‘मैं’ खत्म होती है, वहीं ईश्वर का निवास होता है।

उन्होंने भक्तों से ‘मैं’ को मिटाकर ‘तू ही तू’ (परमात्मा) का सिमरन करने का आह्वान किया। इस अवसर पर राकेश प्रभाकर, पूनम प्रभाकर, रोहित गौतम, योगिता गौतम, सरोज बाला, समीर कपूर, अमरेंद्र कुमार शर्मा, रोहित भाटिया, अजीत कुमार, नरिंदर, राकेश शर्मा, उम्मीद, रजनी, अमनदीप कौर, अमरेंद्र सिंह, नवीन, प्रदीप, सुधीर, सुमीत, मनीष शर्मा, दानिश मौजूद थे।

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Source: Dianik Bhaskar