दिल्ली के पश्चात अब मध्य राज्य के इंदौर में 15 नवंबर को सी-21 मॉल पंजाबी सिंगर दिलजीत दोसांझ के होने वाले लाइव कॉन्सर्ट को लेकर विवाद गहरा गया है। चंडीगढ़ के प्रोफेसर की शिकायत पर अब जिला बाल संरक्षण अधिकारी ने बड़ा निर्देश जारी किया है। कॉन्सर्ट में दि

जिला बाल संरक्षण अधिकारी, महिला तथा बाल विकास विभाग, इंदौर की ओर से 6 नवंबर को मॉल प्रबंधन को पत्र जारी किया गया है। इसमें बताया गया है कि इन गानों के बोल छोटे बच्चों पर गलत प्रभाव डाल सकते हैं। इसलिए कॉन्सर्ट के बीच इन गानों को नहीं गाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

5 वर्ष से बड़ी उम्र के लोगों की एंट्री

विज्ञापनIn-Article Banner

इस वक्त दिलजीत का आरा इंडिया शो चल रहा है। यह उनका इंडिया में दूसरा शो है। इससे पहले शो को लेकर शिकायत हुई। जिसके पश्चात अब जारी पत्र में पंजाब तथा हरियाणा हाईकोर्ट के 22 जुलाई 2019 के आदेश का हवाला दिया गया है। अफसर ने इसी आदेश के पालन में चारों गानों को कॉन्सर्ट में नहीं गाने देने के निर्देश दिए हैं।

पत्र में यह भी लिखा गया है कि C-21 मॉल में होने वाले कार्यक्रम में 5 साल से बड़े बच्चे भी प्रवेश कर सकते हैं। ऐसे में गानों के बोल बच्चों पर गलत प्रभाव डाल सकते हैं। पत्र की एक काॅपी इंदौर कलेक्टर, संबंधित राजस्व अफसर, महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक और विजय नगर थाना प्रभारी को भी भेजी गई है।

प्रोफेसर ने शिकायत में रखी थीं 3 मांगें

चंडीगढ़ के प्रोफेसर डॉ. पंडितराव धारेनावर ने जिला बाल संरक्षण अधिकारी को भेजी शिकायत में 4 गानों पर रोक लगाने के अलावा बच्चों को मंच पर नहीं बुलाने और दिलजीत के कारतूस वाली बेल्ट पहनने पर रोक लगाने की मांग भी की थी। उन्होंने इन मांगों के समर्थन में कई तर्क दिए थे।

1. बोल बदलकर भी न गाए जाएं चारों गाने

शिकायत में 'पटियाला पैग', '5 तारा ठेके', 'जेब विचों अफीम लभिया' और 'जट्ट उठे फायर करदा जित्थे पाबंदी हथियारां दी' गानों को कॉन्सर्ट में गाने पर रोक लगाने की मांग की गई थी। शिकायतकर्ता ने कहा था कि इन गानों के बोल बदलकर भी इन्हें गाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

इसके लिए उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के CWP/27011/2016 प्रकरण में 22 जुलाई 2019 को दिए गए आदेश का हवाला दिया। शिकायतकर्ता के मुताबिक, इस आदेश में शराब, नशीले पदार्थों और हिंसा का महिमामंडन करने वाले गानों पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए थे, क्योंकि इनका बच्चों पर गलत प्रभाव पड़ सकता है।

शिकायत में केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की ओर से चलाए जा रहे 'नशा मुक्त भारत अभियान' का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता ने दलील दी कि शराब और नशीले पदार्थों को बढ़ावा देने वाले गानों को मंच पर नहीं गाया जाना चाहिए, भले ही उनके बोल बदल दिए जाएं।

2. बच्चों को मंच पर बुलाने पर रोक लगाने की मांग

प्रोफेसर ने कॉन्सर्ट के बीच बच्चों को मंच पर आमंत्रित नहीं करने की मांग भी की थी। शिकायत में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा गया है कि तेज आवाज बच्चों की सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंचा सकती है। शिकायतकर्ता का दावा है कि लाइव कॉन्सर्ट में ध्वनि का स्तर 120 डेसिबल से ज्यादा हो सकता है।

इसके साथ ही शिकायत में बताया गया है कि आयोजन के बीच तेजी से जलने-बुझने वाली फ्लैशिंग लाइटें, जिनकी आवृत्ति 5 से 30 हर्ट्ज हो सकती है, कुछ बच्चों में दौरे पड़ने का कारण बन सकती हैं। इससे उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई गई है।

3. कारतूस वाली बेल्ट पहनने पर आपत्ति

शिकायतकर्ता ने दिलजीत दोसांझ को सीने पर क्रॉस के आकार में चांदी के रंग की दो कारतूस बेल्ट (बैंडोलियर) या नकली धातु के कारतूस पहनने से रोकने की मांग भी की थी।

उनका तर्क था कि सीने पर कारतूसों की बेल्ट पहनना बंदूक संस्कृति और हिंसा का प्रतीक है। शिकायत में आशंका जताई गई कि इस तरह की वस्तुओं का प्रदर्शन दर्शकों को हिंसक व्यवहार हेतु उकसा सकता है।

शिकायतकर्ता ने कहा कि कॉन्सर्ट में पांच वर्ष और उससे ज्यादा उम्र के बच्चे भी शामिल होंगे। ऐसे में कारतूसों की बेल्ट और हथियारों से जुड़े हाव-भाव बच्चों के मन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।

अधूरा नहीं! पढ़िए पूरा! पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर ऐप पर