दिवाली के त्योहार को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से प्रदूषण मुक्त और पटाखा रहित ग्रीन दिवाली मनाने की अपील की है। सिविल सर्जन डॉ. तपिंदरजोत ने बताया कि त्योहार की खुशियां मनाते समय अपनी और दूसरों की सेहत का भी ध्यान रखना आवश्यक है।

उन्होंने मिठाई विक्रेताओं से भी अपील की कि वे लोगों की सेहत को ध्यान में रखते हुए मिलावट रहित, शुद्ध और साफ-सुथरी मिठाइयां ही बेचें। उन्होंने कहा कि पटाखों से निकलने वाला जहरीला धुआं और प्रदूषण सांस, अस्थमा, हृदय, आंखों और त्वचा संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ाता है। इसका असर बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं पर अधिक पड़ता है।

उन्होंने बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, सांस व दमे के मरीजों और हृदय रोगियों को दिवाली के दिन अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने की सलाह दी। सिविल सर्जन ने बताया कि यदि बच्चे पटाखे चलाते हैं तो वे बड़ों की निगरानी में ही ऐसा करें। पटाखों को हाथ में पकड़कर न जलाएं और उन्हें जलाते समय पास में पानी से भरी बाल्टी जरूर रखें। दिवाली पर रेशमी और ढीले कपड़ों के बजाय सूती कपड़े पहनें। उन्होंने बताया कि अधजले पटाखों को दोबारा जलाने की कोशिश न करें, क्योंकि वे अचानक फटकर हादसे का कारण बन सकते हैं। उन्होंने आंखों की सुरक्षा को लेकर भी विशेष सावधानी बरतने की अपील की।

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पटाखे चलाते वक्त उन्हें आंखों से उचित दूरी पर रखें। यदि आंख में चोट लग जाए तो उसे रगड़े नहीं, बल्कि फौरन आंखों के विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें। उन्होंने लोगों से दिवाली के दौरान घरों की सफाई करते समय प्लास्टिक के लिफाफों और अनावश्यक सामान का उचित निपटान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखना चाहिए एवं स्वच्छता से जुड़ी अच्छी आदतें अपनानी चाहिए।

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