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कनाडा परमानेंट रेजिडेंट बनने का सपना देखने वाले लाखों पंजाबियों हेतु एक राहत भरी खबर सामने आई है। कनाडा सरकार ने देश में पहले से रह रहे 2 लाख अस्थायी निवासियों को PR देने हेतु 'वन-टाइम' योजना का ऐलान किया है।
कनाडा सरकार के इस निर्णय का सबसे बड़ा लाभ वर्क परमिट और स्टडी-लिंक्ड वर्क परमिट पर कनाडा में रह रहे भारतीय युवाओं, विशेषकर पंजाबी छात्रों और वर्क परमिट धारकों को मिलेगा।
पिछले कुछ वक्त से कनाडा में आवास संकट और महंगाई के कारण इमिग्रेशन नियमों में लगातार की जा रही सख्ती के पश्चात अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे युवाओं के लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं है।
सरकार द्वारा पेश बजट और इमिग्रेशन-स्तर योजना के तहत यह 2 लाख पीआर स्लॉट नियमित वार्षिक कोटा 3.80 लाख पीआर सालाना के अतिरिक्त रखे गए हैं।
अस्थाई निवासियों को पीआर देने हेतु दो वर्ग 'वर्कर्स कोहॉर्ट' और ‘ह्यूमैनिटेरियन कोहॉर्ट’ बनाए गए हैं। दोनों वर्गों में एक-एक लाख लोगों को पीआर मिलेगी।
सरकार का मुख्य मकसद 2027 के अंत तक अस्थायी निवासियों की कुल आबादी को घटाकर 5 प्रतिशत पर लाना है, जिसके लिए पहले से मौजूद वर्क परमिट धारकों को पक्की पीआर देकर राष्ट्र में ही सेटल किया जा रहा है।
कनाडा सरकार की पीआर देने की योजना को सिलसिलेवार जानिए...
- वन-टाइम स्पेशल मेजर: कनाडा सरकार ने इमिग्रेशन सिस्टम में आवेदनों के बैकलॉग को खत्म करने हेतु 2 लाख अतिरिक्त निवासियों को पीआर देने की योजना बनाई है। यह नियमित पीआर देने के सालाना टारगेट 3.80 लाख से अलग और अतिरिक्त कोटा होगा।
- दो बराबर कोहॉर्ट्स में मिलेगी पीआर: वर्कर्स कोहॉर्ट में कनाडा में पहले से मौजूद उन वर्क परमिट धारक अस्थायी निवासियों और उनके परिवारों को प्राथमिकता दी जाएगी, जो एक्सप्रेस एंट्री या PNP के तहत योग्य हैं। ह्यूमैनिटेरियन कोहॉर्ट में मानवीय आधार, हांगकांग व यूक्रेन फैमिली रियूनिफिकेशन पाथवे के तहत बचे आवेदनों और कनाडा में रह रहे नागरिकों या पीआर धारकों के पति/पत्नी व बच्चों के आवेदनों को निपटाया जाएगा।
- वार्षिक कोटा रहेगा स्थिर: सरकार ने 2027 से 2029 तक अपने नियमित कोटा को स्थिर रखने का निर्णय लिया है, जिसके तहत प्रति साल 3,70,000 नए अस्थायी निवासी और 3,80,000 स्थायी निवासी स्वीकार किए जाएंगे।
- जनसंख्या अनुपात घटाने का लक्ष्य: सरकार का प्रमुख लक्ष्य 2027 के अंत तक राष्ट्र में अस्थायी निवासियों की आबादी को कुल जनसंख्या के 7.2% से घटाकर 5% तक लाना है।
- टीएफडब्ल्यू प्रोग्राम में सुधार: टेंपरेररी फोरेन वर्कर्स कार्यक्रम में सुधार के लिए $152-मिलियन आवंटित किए गए हैं, ताकि श्रम आवश्यकताओं को स्थानीय और क्षेत्रीय जरूरतों के हिसाब से बेहतर ढंग से लाइनअप किया जा सके।
- असाइलम बैकलॉग और मदद फंड: असाइलम अर्थात शरणार्थी आवेदनों के बकाए को समाप्त करने हेतु 5 वर्षों में $98-मिलियन एवं प्रवासी श्रमिकों की मदद करने वाले गैर-लाभकारी समूहों हेतु $82-मिलियन निर्धारित किए गए हैं।
किस-किस वर्ग को मिलेगा लाभ, जानिए...
- वर्क परमिट और पीएनपी वाले पंजाबी युवा: जो युवा वर्क परमिट पर हैं और एक्सप्रेस एंट्री या प्रोविंशियल नॉमिनी प्रोग्राम (PNP) की पात्रता रखते हैं, उन्हें 'वर्कर्स कोहॉर्ट' का सीधा फायदा मिलेगा। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों को प्रांतीय कोटे के तहत विशेष प्राथमिकता दी जाएगी।
- विशेष पायलट प्रोग्राम के आवेदक: स्टार्ट-अप वीजा प्रोग्राम, होम केयर वर्कर पायलट प्रोग्राम्स, अटलांटिक इमिग्रेशन प्रोग्राम और एग्री-फूड पायलट जैसे विशेष मार्गों से आवेदन करने वाले अस्थायी श्रमिकों को प्राथमिकता श्रेणी में रखा गया है।
- फैमिली रियूनिफिकेशन: कनाडा में रह रहे पीआर या कनाडाई नागरिकों के भारत में मौजूद या कनाडा में साथ रह रहे पति/पत्नी और आश्रित बच्चों के पेंडिंग पीआर आवेदनों को तेजी से मंजूरी मिलेगी।
- मानवीय आधार वाले मामले: विशेष परिस्थितियों या मानवीय आधार के तहत लंबित पड़े आवेदनों को भी इस 1 लाख वाले मानवीय कोहॉर्ट के तहत कवर किया जाएगा।







