जालंधर ग्रामीण पुलिस ने पराली जलाने के खिलाफ एक विशेष अभियान छेड़ा है। इस मुहिम के तहत जहां नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है, वहीं अन्नदाताओं को पराली न जलाने के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है। एसएसपी जालंधर ग्रामीण हरवि

जालंधर ग्रामीण के SSP स. हरविंदर सिंह विर्क स्वयं गांवों का दौरा कर रहे हैं। वे सीधे अन्नदाताओं से संवाद स्थापित कर रहे हैं और उन्हें पराली जलाने से होने वाले गंभीर नुकसान के बारे में बता रहे हैं। उन्होंने जिला पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ जागरूकता अभियानों को भी पूरी गंभीरता से चलाया जाए। एसएचओ द्वारा अन्नदाता बैठकों का हो रहा कार्यक्रम जिले के समस्त सब-डिवीजनों में संबंधित डीएसपी की देखरेख में थाना प्रभारियों (एसएचओ) द्वारा अन्नदाता बैठकों का आयोजन किया जा रहा है। इन बैठकों का मुख्य मकसद किसानों को पराली न जलाने हेतु प्रेरित करना और पराली प्रबंधन के आधुनिक और वैज्ञानिक विकल्पों की जानकारी देना है। पुलिस प्रशासन किसानों को सरकार द्वारा मुहैया कराई जा रही कृषि मशीनों का उपयोग करने की सलाह दे रहा है।

पराली के धुए से पर्यावरण को होती है हानी

विज्ञापनIn-Article Banner

पराली जलाने से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण को बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंचा देता है। इससे सांस की बीमारी, अस्थमा, आंखों में जलन, फेफड़ों और दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा अनेक गुना बढ़ जाता है। इसके साथ ही, सड़क पर धुएं की वजह से दृश्यता (विजिबिलिटी) घटने से हादसों का डर भी बना रहता है। खेत में आग लगाने से मिट्टी के मित्र कीट मर जाते हैं और जमीन की उपजाऊ क्षमता को भी भारी नुकसान पहुंचता है। पर्यावरण को बचाना पूरे समाज की जिम्मेदारी

एसएसपी हरविंदर सिंह विर्क ने कहा कि पर्यावरण को बचाना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज का साझा कर्तव्य है। उन्होंने समस्त किसानों से अपील की है कि वे पराली में आग लगाने से बचें और पर्यावरण मित्र तरीकों को अपनाएं। जालंधर ग्रामीण पुलिस ने साफ किया है कि एक तरफ जहां जागरूकता अभियान जारी रहेगा, वहीं दूसरी तरफ नियमों को तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।

अधूरा नहीं! पढ़िए पूरा! पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर ऐप पर