पंजाब में आज दिवाली मनाई जा रही है। दिवाली पर लक्ष्मी पूजन का समय शाम को 5:33 बजे से प्रारंभ हो जाएगा, लेकिन 5:55 से 7:50 बजे तक पूजा हेतु विशेष शुभ मुहूर्त है।

दंडी स्वामी मंदिर के पंडित रोहित शास्त्री का कहना है कि स्वाति नक्षत्र की वजह से दिवाली पूजन पर विशेष संयोग बन रहा है। उनका कहना है कि 4:11 बजे से 5:32 बजे तक राहु काल रहेगा। राहु काल समाप्त होते ही लक्ष्मी पूजन का वक्त आरंभ हो जाएगा।

रात 10:21 बजे तक लोग लक्ष्मी पूजन व दीपमाला कर सकते हैं। अमावस्या दिवाली के अगले दिन यानि 9 नवंबर सोमवार तक उदया तिथि के रूप में रहेगी। इस कारण 9 नवंबर को सोमावती अमावस्या पर तीर्थ स्नान व दान अवश्य करें।

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वहीं देर रात अमृतसर में गोल्डन टेंपल में भव्य दीपमाला की जाएगी, इसके अलावा आतिशबाजी भी होगी।

स्वाति नक्षत्र व आयुष्मान योग का विशेष संयोग श्री दंडी स्वामी मंदिर के पंडिंत रोहित शास्त्री का कहना है कि कार्तिक अमावस 8 नवम्बर को दोपहर 11:29 बजे के पश्चात से प्रारंभ होकर प्रदोष, निशीथ तथा महानिशीथ काल में व्यापिनी रहेगी।

उन्होंने कहा कि इस दिन सायं काल स्वाती नक्षत्र, आयुष्मान योग, तुला राशि स्थित चन्द्रमा एवं अर्धरात्रि व्यापिनी अमावस्या का विशेष प्रशस्त एवं शुभ संयोग बन रहा है।

उन्होंने जानकारी दी कि लक्ष्मी पूजन हेतु वृषभ लग्न व प्रदोष काल देखा जाता है जो कि शाम 5:55 से 7:50 तक है। राहु काल के पश्चात किसी भी वक्त पूजा की जा सकती है।

सोमवार को पितरों के नाम कर सकते हैं दान दिवाली के अगले दिन 9 नवंबर को सोमवती अमावस्या रहेगी। पंडित रोहित शास्त्री के मुताबिक, अमावस्या पर पितरों के नाम दान-पुण्य करने की परंपरा है।

हालांकि, हर महीने की अमावस्या पर पितरों के नाम दान किया जा सकता है, लेकिन कार्तिक अमावस्या को सालाना दान के लिहाज से विशेष महत्व दिया जाता है। अनेक परिवार इस दिन पितरों के नाम पर वस्त्र और अन्य सामग्री दान करते हैं।

मुश्किल से आती है सोमवती अमावस्या लुधियाना के पंडित सुमित वेदपाठी ने कहा कि कार्तिक मास में पवित्र नदियों, सरोवरों और तीर्थों में स्नान का विशेष महत्व है। प्राचीन वक्त से ही कार्तिक मास में स्नान की परंपरा चली आ रही है।

इस बार कार्तिक मास में सोमवती अमावस्या का संयोग बन रहा है। इस दिन स्नान करना अधिक फलदायी माना जाता है। सूर्योदय के साथ शुरू हो रही सोमवती अमावस्या पर श्रद्धालुओं को स्नान, दान और पितरों का पूजन करना चाहिए।

लक्ष्मी पूजन से पहले करें पंच देवों का पूजन पंडित सुमित वेदपाठी का कहना है कि लक्ष्मी पूजन से पंच देवों का पूजन जरूर करना चाहिए। उन्होंने बताया कि श्रीगणेश, कलश, षोडशमातृका तथा ग्रहपूजनपूर्वक भगवती लक्ष्मी का षोडशोपचार पूजन करें।

महाकाली का पूजन दवात के रूप में करें। महासरस्वती का पूजन कलम व बही खाता के रूप में करें। कुबेर का पूजन तुला रूप में करें।

इसी समय दीपपूजन करके यमराज एवं पितृगणों के निमित्त ससंकल्प दीपदान करें। इसके पश्चात निशीथ आदि शुभ मुहूर्त में मन्त्र-जप, यन्त्र सिद्धि आदि अनुष्ठान करें।

लक्ष्मी जी को अष्टकमल पर करें स्थापित पंडित रोहित शास्त्री का कहना है कि अष्टदल कमल पर श्रीलक्ष्मी जी का आह्वान और स्थापना करके देवों की विधिवत पूजा करें। पूजा में विभिन्न प्रकार की मिठाई, फल, पुष्प, अक्षत, धूप, दीप आदि सुगन्धित वस्तुएं शामिल करें। उसके बाद लक्ष्मी जी का मंत्र उच्चारण करें। उसके पश्चात गणेश जी का मंत्र बोलें। पूजा में मां लक्ष्मी को सफेद वस्त्र, चावल (अक्षत) और सफेद फूल अर्पित करें। मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए उनका दही से अभिषेक करें।

500 पुलिसकर्मी-32 दमकल गाड़ियां अलर्ट पर

  • 500 पुलिसकर्मी संभालेंगे सुरक्षा: दिवाली पर करीब 500 पुलिसकर्मी सड़कों पर तैनात रहेंगे। वाहनों की चेकिंग के साथ होटलों पर नजर रखी जाएगी। दड़ा-सट्टा और जुआ खेलने वालों पर कार्रवाई हेतु टीमें बनाई गई हैं। शहर के एंट्री-एग्जिट पॉइंट पर नाकाबंदी रहेगी।
  • अस्पताल में तैयारी: SMO डॉ. अखिल सरीन के अनुसार, मेडिकल स्टाफ को 24 घंटे अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं। बर्न यूनिट के 6 बेड के अलावा अतिरिक्त बेड की व्यवस्था की गई है। ICU और मेडिकल लैब 24 घंटे चालू रहेंगे। इमरजेंसी में पुलिस बल भी तैनात रहेगा।
  • दमकल महकमा अलर्ट: फायर ऑफिसर जसविंदर सिंह ने जानकारी दी कि दिवाली पर पूरे स्टाफ की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। 32 दमकल गाड़ियों और करीब 125 कर्मियों को तैनात किया जाएगा। 4 जगह अस्थायी फायर स्टेशन बनाए जाएंगे। समस्त स्टेशनों पर जनरेटर की व्यवस्था की गई है।

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